भारत : विकसित या विकासशील

देश विकसित है या विकासशील यह यह निर्धारित करने का पैमाना किसका है? किसी अन्य देश का! समाज का! या किसी व्यक्ति का!

आज 21वी शताब्दी में भारत विश्व का सबसे युवा देश है, आज के समय पर अन्य देश भारत के साथ अपना राजनैतिक, आर्थिक एवं सामाजिक समरसता को बनाए रखते हुए निरंतर आगे बढ़ने के प्रयास में लगा हुआ है। ताकि स्वयं का तो विकास हो, साथ ही साथ उसकी पहचान भी बने रहे।

आज के समय के सापेक्ष भारतवर्ष में सभी प्रकार के संसाधन और उसकी उपयोगिता के सापेक्ष हर प्रकार से संभावित रूप से उसे बेहतर बनाते हुए देश के विकास में उसका योगदान किस प्रकार लिया जा सकता है, इस पर विस्तार से कार्य हो रहा है। यह कार्य कुछ वर्षों का नहीं भविष्य के सोच के साथ आज की जरूरत को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
हम यह भी जानकारी होनी चाहिए कि जब भी किसी भी नये रास्ते पर हम आगे बढ़ते है, तो हमे उस रास्ते की लंबाई और उस रास्ते पर आने वाले अवरोधों के बारे में पूर्णत: ज्ञान हो, ये आवश्यक नहीं है। ठीक उसी प्रकार देश के प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने पर की प्रकार के चुनौतियों को हमे ध्यान में रखना नितांत आवश्यक है, जिससे आने वाले अवरोध की जानकारी समय पर हो जाए, और उसका समय से निदान हो।

देश विकसित है या विकासशील यह यह निर्धारित करने का पैमाना किसका है? किसी अन्य देश का! समाज का! या किसी व्यक्ति का!

सभी की अपनी समझ है, अपने तौर-तरीके है। सभी के पैमाने अलग है, और उनकी क्षमता भी।

जिस तरह सोनार धातु की क्षमता के आढ़त पर उसकी नक्काशी किस प्रकार कितने बड़े आकार में करनी है, तय करता हिय, उसकी प्रकार समाज, व्यक्तियों या अन्य देश द्वारा यह अपनी सोच के पैमाने के दायरे में रह करके ही आंकलन किया जाता है।

संचार क्रांति से समाज में बदलाव हुए, लोगों का जुड़ाव एक-दूसरे से और भी त्वरित गति से होना प्रारंभ हो गया, जानकारियों के आदान-प्रदान से समाज में नित नये सकारात्मक बदलाव सामने आए। जिससे व्यवस्था, जानकारी और तरीके में बदलाव भी हो रहे है। साथ ही साथ गलत सूचनाओं का नित प्रसार होता रहता है, जिससे समाज में सही जानकारी के अभाव में मतभेद भी समय-समय पर उत्पन्न होते रहते है।

आधुनिकता के साथ पैमानों में बदलाव होते है, जो कि एक सकारात्मक पहलू है। परंतु क्या यह सभी के लिए सकारात्मक हो सकता है? इस पर विचार किया जाना आवश्यक है।

उसी प्रकार, भारत विभिन्नता में एकता की पहचान बनाए रखने से हुई है।

सोच विकसित या विकासशील के दायरे से बाहर निकाल के सामाजिक एकजुटता की हो, तब समाज का विकास संभव है। अन्यथा अपने देश के पश्चिम तरफ विश्व का आधुनिक हथियार रखने वाला देश भी अपने समाज को सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं हो पा रहा है, वही भारत के दक्षिण में स्थित एक अन्य स्वतंत्र देश अपने विरासत को बनाए रखते हुए भी अनवरत आगे की और अग्रसर है।

पूर्ण रूप से यही कहा जाना उचित है, कि सामाजिक परिवेश ही तय करता है, कि आप समाज या देश के रूप में सक्षम है या नहीं। कोई अन्य आपकी तुलना अपने पैमाने पर करे, या हम उसे करने दे यह उचित नहीं है। क्योंकि राष्ट्र के रूप में हमारी अपनी जिम्मेदारियाँ होती है, और अपने कर्तव्य है। जिसके अपने दायित्व है।

भारत का विकासशील देश से विकसित की शृंखला में आना एक महत्वपूर्ण स्थान तो रखती ही है, परंतु समाज के अंग होने के नाते हमें स्वयं से यह प्रश्न भी पूछना चाहिए कि क्या उस स्थान को पाने के लिए हम सामाजिक दायरे का नैतिकता त्याग तो नहीं कर रहे है।

15 thoughts on “भारत : विकसित या विकासशील

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