अरे… ओ.. लड़की….

अरे… ओ.. लड़की,
अर्धनग्न बदन गोद मे लिए एक बच्चे को उल्टी दिशा में भागते हुए एक लड़की जो ख़ाकी वर्दीधारी को अपने तरफ आता देख, तेज़ी से वहाँ से जाने लगी थी….
आवाज सुन के रुक गयी..
यहां क्या कर रही हो..? अकेले इस लड़के को ले के इधर उधर न घूमो घर जाओ… ड्यूटी पर खड़े एक ख़ाकी वर्दीधारी ने कहा…
लड़की सहमी हुई सुन रही थी सब कुछ..बिना कुछ बोले…
क्या हुआ… बेटा?? कुछ खाना है…?? शनि ने उसके गोद के बच्चे को एक टॉफी देते हुए पूछा…
अंकल… उस कॉलोनी में जा रहे थे… वहा एक घर में… अपनापन समझते हुए लड़की ने धीरे से शनि से कहा…
वहां तुम्हारा घर है…? पीछे की तरफ इशारा कर शनि बोला…
नही वहां आंटी के यहां काम करते है… वो आज कपड़ा देने को कही है.. सोनू को, इसलिए जा रही थी..
क्या काम करती हो…? शनि ने अचरज़ से पूछा…
आंटी जो कहती है वो कर देते है…सफाई, झाड़ू लगाते है, बर्तन भी माँज देते है… उसकी आँखों मे चमक भी आने लगी यह कहते कहते…
अच्छा ठीक है, चलो आओ हम छोड़ देते है… शनि ने अपना हाथ उसका हाथ पकड़ने के लिए आगे बढ़ाया.. जिसे पकड़ के वो भी चलने लगी।
किस क्लास में पढ़ती हो…? शनि ने चलते चलते पूछा…
अभी स्कूल नही जाते है अंकल… बोलते हुए उस लड़की की आवाज में हल्का कसाव सा आ गया था, जिसे शनि भी महसूस कर रहा था…
आप उनसे यही पूछने जा रहे है न, कि हम साफ से काम करते है कि नही.. बच्ची की बात में शनि को उसके अंदर जिम्मेदारी की मजबूरी झलक रही थी.. जिससे शनि को द्रवित कर दिया।
अंकल वो काला वाला बटन दबाइये, गाना बजेगा तो अंदर से कोई आएगा.. लड़की ने शनि को इशारा करते हुए कहा जो कि बच्चे को पकड़ने की वजह से उस बटन तक नही पहुँच पा रही थी।
अच्छा सुनो… हम छिप जाते है… जब अंदर से तुम्हारी आंटी आयेगी तब हम उनको झटके से आ के डरा देंगे… ठीक…??? शनि ने परिस्थिति को समझने के लिए उस छोटी बच्ची को फुसलाया…
हां अंकल… मजा आएगा… बच्ची ने भी खुशी से हामी भर दी…. और शनि घण्टी बजा के बगल की दीवार के पीछे अपने सहयोगियों के साथ छिप गया…
घण्टी बजते ही एक कुत्ते की जोर जोर से भौकने की आवाज तेज होती गयी… फिर पीछे से आवाज आयीं…
का रे सलोनिया… सुबह क्यू नही आती, दोपहर में बर्तन मांजेगी तो खाना शाम को बनेगा क्या… एक बात समझ मे नही आती तेरे को…
इतना सुनना ही था कि शनि जो पहले से ही आशंकित था, दरवाजा खुलते ही उस महिला के सामने आ गया जो उस लड़की पर आते ही बरस रही थी…
उम्र में बड़ी है, पर हमें हाथ पैर तोड़ते देर नही लगेगी… यह तरीका होता है किसी बच्चे से बात करने का…शनि गुर्राते हुए बोला…
अ.. आर..अरे… कौन, कौन है आप सब…? एकाएक अपने सामने कुछ लोगो को बढ़ता देख हकबकाते हुए उस महिला का संतुलन बिगड़ गया…
घर में आदमी कौन है बाहर भेजों… शनि के साथ आये एक सिपाही ने पीछे से कहा…
आवाज की तेजी सुन अगल बगल और घर के कुछ सदस्य वहाँ इकठ्ठा होने लगे।
थोड़ी सी भी तमीज़ नही है, खुद को संभ्रांत परिवार का समझते हो, और ऐसी घटिया हरकत करते हुए तुम सब को शर्म तक नही आ रही होगी… शनि एकदम आपे से बाहर था…
इतनी तेज आवाजो की वजह से वहां खड़ी वो छोटी लड़की सलोनी और उसका गोदी में लिया छोटा भाई दोनो सहम गए और रोने लगे… समझ ही नही पा रहे थे दोनो की हो क्या रहा है।
शनि ने दोनों को बाहर ले जाने को कह के वहाँ उपस्थित उस परिवार और अगल बगल के उन जैसे लोगो पर वैधानिक कार्रवाई करते हुए सलोनी और उसके भाई के पास वापस आया…
सलोनी जो कि अभी तक शनि को अपना मान के सब बातें बोलते हुए वहां लायी थी, अब उसके पास आने से डरने लगी।
अरे बेटा, रुको तो इधर… वो गन्दे लोग थे तो उनको डांटना पड़ा… तुम अच्छी हो न..? तो तुम गन्दे लोगो के यहां जाओगी तो तुमको भी सब लोग गन्दा गन्दा कहेंगे न… बताओ….?
सलोनी सकुचते हुए हाँ में सर हिलायी…
पर अंकल आंटी आज कपड़े देने को कही थी, सोनू को… अब हम अपनी अम्मा से का कहेंगे…
अरे हम है न… पर हमसे पक्का करो कि तुम स्कूल जाओगी..और सोनू को भी ले के जाओगी तब तुमको हम नया नया कपड़ा अभी दिलवाएंगे… शनि ने सोनू को गोदी में लेते हुए सलोनी से कहा..
हमारे अम्मा बाबूजी नही पढ़ा पाते है, कहते है पैसा कमाना जरूरी है.. नही तो खाना नही मिलेगा… सलोनी ने मासूमियत से जवाब दिया…
अच्छा आओ चलो, उनसे भी मिल लेते है… शनि ने आगे बढ़ते हुए कहा…
नही अंकल आप उनको भी डाँटोगे… ये कहते ही सलोनी रो पड़ी…
अरे नही नही… उनको क्यू डांटेंगे… वो लोग गन्दे थोड़े ही है… शनि ने बहुत कोशिश कर दोनों को दोनो हाथ में अपने गोद में लेते हुए कहा…. अच्छा बताओ किधर रहती हो…शनि ने प्यार जताते हुए पूछा…
कुछ समय बाद.. दोनो को अपनी गोद में लिए हुए शनि कपड़े के आवरण से बने घर जैसे एक जगह पर पहुँचा…
ए अम्मा… बाहर आओ… सोनू ने अपनी माँ को आवाज लगायी…
दोनों के अम्मा और बाबूजी एक साथ बाहर आ गए…
इन दोनों को अंदर ले जाइये… गोदी से उतरते हुए दोनों बच्चो को उसकी माँ के साथ अंदर की ओर जाने का इशारा करते हुए कहा…
बच्चों को काम करने के लिए क्यों भेजते है आप…? शनि ने उन सभी के घर के अंदर जाते ही सवाल दागा…
साहब..  जेके यहां के जात रहल, वहाँ सलोनी क माई जात रहल, पर जब से बंद भयल है तब से बच्चन के भेजे के पड़त है, का करी साहब कुछ पैसा न मिली त कइसे हम सब खाएब… उसके पिता ने अपनी मजबूरी बताई…
अच्छा ठीक है… अब से इन सब को उसके या कही भी न भेजना… कल सुबह तुम चौराहे पर 7 बजे जा के खाने का सामान लेते रहना, जब तक काम पर नही जा पा रहे हो, और यह लो पैसे…शनि ने अपने पर्स को टटोलते हुए कुछ पैसे निकालते हुए उसकी तरफ बढ़ाया… इससे सोनू के लिए कुछ कपड़े ले लेना बाद में, और उल्टा सीधा खर्चा किये तो फिर समझना…. शनि ने आँख तरेरते हुए कहा..
नाही साहब… पक्का दिलवाईब…
और हां, ये लो आज का खाना बना लो…और ये दोनों स्कूल में पढ़ने जाने चाहिए, हम बाद में खुद आ के देखेंगे.. नही तो अंदर डाल देंगे…
अरे ना साहब… हाथ जोड़ते हुए आदमी शनि की तरफ झुका..
तब तक दोनों बच्चे बाहर आ गए…
अच्छा हम जा रहे है, तुम्हारे पापा तुम लोगो को नया कपड़ा दिलवाएंगे कुछ दिन के बाद… परेशान न करना…
दोनो ने सहमति में सर हिलाया…
अच्छा पप्पी तो दो…शनि ने सोनू से अपना गाल आगे बढ़ाते हुए कहा…
सोनू इधर उधर देखने लगा…
अरे बबुआ चुम्मी देइ दो चुम्मी… अंकल को… सलोनी ने उसको पैर से हिलाते हुए कहा…
सुनते ही सोनू ने शनि को चुम्मी दी…और गोदी से उतर गया…
चलते है… टाटा…. शनि ने कहा…
टाय टाय… टाय टाय…. पीछे से सोनू ने आवाज दी… जो कि शनि और उसके सहयोगियों को दूर तक संतोष का एहसास करवा रही थी…

17 thoughts on “अरे… ओ.. लड़की….

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