गाड़ी वाले अंकल….

भइया…

आप गाड़ी वाले अंकल के साथ आये है….?

शनि जो कि अपने साथ खड़े एक शख्स से कुछ बात कर रहा था…उसकी पैंट को खिंचते हुए उसके घुटनों के बराबर के बच्चे ने पूछा…
क्या हुआ बाबू…? तुम किसके साथ आये हो… शनि ने इधर उधर दिख रहे कुछ लोगो मे से उस बच्चे के अपनो की तलाश करते हुए उससे पूछा..
भइया हम वहां रहते है, उधर से ये टोपी वाले अंकल किसी को आने नही दे रहे है.. हम उसके पीछे से छिप के आये है..इधर.   डरे सहमे लफ्जो में अपने घर की ओर इशारा करते हुए शनि से कहा..
कुछ खाओगे… शनि ने अपने जेब मे पड़ी चॉकलेट उसकी तरफ बढ़ाते हुए पूछा…
भइया पैकेट का खाना भी दो न…हम देखे है आप उस गाड़ी वाले को डांटे थे, उससे कहिये न हमको भी दे… हमारी मम्मी को चोट लगी है.. और हमको दे नही रहे है…
थोड़ी दूर पर खड़ी जरूरतमंदों के लिए राशन वितरण करने वाली वैन को घूरते हुए कहा…
अच्छा… कहते हुए शनि ने उसको गोदी में उठाया…   चलो देखे क्यू नही दे रहे अंकल… कह के बढ़ा ही था, की छोटा से हाथ शनि ने मुंह पर बंधे मास्क को नाक तक पहुँचते हुए देखा…
नजर पड़ते ही बच्चे ने अपना हाथ हटा लिया…
अरे बराबर से लगाओ न… बच्चे को सहमता देख शनि ने मुस्कुराते हुए कहा…
तब तक दोनों उस वैन तक पहुँच गए थे…

अरे राजेश.. सभी को यहां मिल गया है अब तक कि कोई बचा है?
नही सर.. हो गया… बस गिनती के बाद निकलते है तुरन्त…
अच्छा ऐसा करो 2 पैकेट और निकालो…एक जगह और देना है… बच्चे की तरफ इशारा करते हुए शनि ने राजेश से कहा…
अरे सर… इन सब का रोज का है, खुद भी लेते है और बच्चो से भी लाइन में लगवाते है…
इतना कहा ही था कि बच्चा जोर से चिल्लाया… मेरी मम्मी नही ले के गयी है, आप झूठ बोल रहे है, हमको भी डॉट के भगा दिए थे..आप बहुत गन्दे है… और फूट फूट के रो पड़ा…
इतनी तेज आवाज से राजेश एकदम से सहम गया…
अरे नही… न रो ओ…हम है न… हम ले के चल रहे है…न रो ओ.. शनि ने उसके आंसू पोछते हुए कहा…
लाओ 2 पैकेट…..   शनि ने राजेश को घूरा…
बाबू तुम पैदल चलो तब दोनो पैकेट पकड़ ले हम…शनि ने गोद से उसे उतारते हुए कहा..
नही हम दोनों लेते जाएंगे…उतर के दोनो पैकेट को असफल तरीके से उठाते हुए कहा…

ओहो भारी है बाबू… चलो हम चल रहे है न… शनि ने एक पैकेट उसके हाथ से लिया…
भरोसा करते हुए उसने हां में सर हिलाया और आगे बढ़ चला…

हल्की सी फ़टी पैंट और मटमैलापन से दिखने वाले कपड़ा…. जिसे शर्ट भी नही कहा जा सकता..पहने कदमो की चाल एकदम से तेज हो चली थी…
शनि उसके पीछे पीछे ही था… तभी बच्चा एक खंडहर में गया.. जहाँ एक औरत पानी पीने की कोशिश कर रही थी.. और अपने बच्चे को देखते ही बोल पड़ी…
कहा खेले चल गयल रहले… हेतनी धूप हव.. ज्यादा खेलबे त जल्दी भूख लग जाइ तब का करबे…
बच्चे ने थैले को ऊपर उठाते हुए दिखाया… जिसकी चमक उसके आंखों में दिख रही थी..
अरे इ का… उसकी माँ ने आश्चर्य से उससे उसका पकड़ा हुआ सामान लिया…
और ऊपर सर उठाते हुए शनि को देखा… जिसके हाथ मे भी पैकेट था….
और देखते ही….
अरे साहिब… हमके न मालूम इ कहा से ले के आयल ह बच्चा ह माफ़ कर दा… अइसन गलती न करी… न निकले देब.. जाए दा साहिब..माफ कर दा..
अरे रुकिए तो… शनि टोकना चाहा… पर सफल नही हुआ…
हम दुइ जानी फस गयल हइ एहर.. हमार कोनो न ह इहा… हमार मर्द गावे हव… बस्ती में… न जा पयली साहिब माफ़ कर दा…

अरे रुको.. तो… ये यही सब ले के आया है, इसके साथ ये भी लाये है…
शनि ने दूसरा पैकेट भी उस महिला को दिया…
उसने खाने के उस पैकेट को देखा और अपने बच्चे को देखा… फिर कहा…
साहिब बहुत बहुत खुश रहीं आप… और अपने बच्चे के पास चली गयी… एक टूटे हुए खंडहर के टूटे हुए कमरे की तरफ जिसकी छत सलामत थी…

शनि ने दोनो को देख एक लंबी सांस ली..और मुड़ा…
तभी उसे लगा कि कोई उसके पैरों को किसी ने पकड़ा है…पलट के देखा…
तो मुस्कुराते हुए चेहरे से एक आवाज आई… थंकु…
शनि उस समय अपने अंदर एक अगल ही अनुभूति करने लगा…
बच्चे को गोद मे उठाते हुए… अपने मास्क को नीचे किया और उसके गाल पर अपना प्यार जताया…
अरे नही… न करिये… सब कहे है कि दूसरे को छूते ही एक बीमारी आ जाती है…
शनि हंस पड़ा… और बोला… तुम जैसे बहादुर बच्चे को तो देख के भाग जायेगी… और उसके सर पर हाथ फेरने लगा….

बच्चे ने भी हाथ हिलाते हुए अपने माँ के तरफ कदम बढ़ाया…
थोड़ी दूर बड़ा ही था शनि तभी एक आवाज आई…
भइया… पीछे मुड़ कर जब शनि ने उस बच्चे को देखा..  तब एक बार फिर आवाज आयीं….
थंकु…

और खिलखिलाहट वाली हंसी वहाँ के सन्नाटे में गूँजने लगी…

16 thoughts on “गाड़ी वाले अंकल….

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