बनारस और उसका अल्हड़पन….

चच्चा… का खबर बा आज….
गश्त पर निकली फ़ोर्स के साथ मौजूद शनि ने बनारस की एक गली में दुआर पर आधा कंधा टिका के लेटे हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा….
अरे साहब लोगन… हम इहा अकेले हइ, कोनो के साथ न हइ.. घरवा में बइठल बइठल मनवा थक गइल बा…
कहबा त चल जाइब… खुद को सीधा करते हुए चच्चा ने जवाब दिया..
अरे.. ठीक ह… शनि ने हाथ से इशारा करते हुए… जैसे बैठे थे वैसे ही रहने का इशारा किया….
आप लोगन क त बड़ा दौड़ाई होत होइ..एह समय… चच्चा ने बात शुरु करनी चाही…
ऐसा है, चलिए घर जाइये.… देखा देखी और लोग भी निकलेंगे… घर मे रह के आराम करिये… गश्त में मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने रौबदार आवाज़ में उस बुजुर्ग व्यक्ति से कहा…
ठीक है साहब… बस जात बानी… उस बुजुर्ग व्यक्ति ने अखबार समेटने की कोशिश करते हुए धीरे से कहा..
चलिए आगे से हो के आते है.. और भी गलियां भी देख लिया जाए… शनि ने बात को काटने की कोशिश की….
पर सर.. यह.. अधिकारी ने शनि से कहना चाहा… जिसे शनि ने सर हिलाते हुए रोक दिया…
चलिए आगे चलते है… शनि कह आगे के तरफ बढ़ चला…

कुछ दूर आगे जाने पर….
ऐसा है महानुभाव… ये बनारस है, ज्यादा दबाव से कोई काम होता नही है… हमहू गुरु है, आपहु गुरु है… मालूम है वो व्यक्ति वहां से जाएगा नही… रहेगा उसी तरह… पर उसके मन मे एक बात रहेगी कि किसी ने उससे अच्छे से बात की थी… शनि ने उस अधिकारी को समझाया… जो उसके साथ आगे दूसरी गली की तरफ मुड़ चुका था…
तय इलाकों में निगरानी कर वापस आते समय…
सर चलिए एक बार देख ले… आप जो कहे वही किया कि चला गया…लगता नही की अब होगा वहां.. खुद ब खुद अपनी बातों पर मुस्कान लिए उसने शनि से कहा…
अच्छा चलिए आइये… आप भी देख लीजिए… शनि ने भी मुस्कुरा के जवाब दिया…
सभी उस पुराने जगह पर पहुँचे जहां वो व्यक्ति था…
देखिए कहा था न… यहीं होगा… आराम से लेटे चच्चा के तरफ शनि ने इशारा किया…
सभी वहां पहुँचे, उनको देखते ही वो बुजुर्ग व्यक्ति खड़े हुए… और कहा… जानत रहली वापस आईबा एहरे से… तनी सुस्ता ला.. ला पानी पिया…
अपने बगल से पेठा और पानी के कई बंद बोतलों को आगे करते हुए कहा…
सब एक दूसरे को देखने लगे…
अरे सब पाकिट में बा… हउ दवा छिड़क ला.. साफ हो जाई.. उस व्यक्ति ने शंकित अपने सामने लोगो से कहा…
अरे रहे दा, चच्चा हेतना मेहनत के करी… दा हमके…. शनि ने पैकेट लिया… और फाड़ दिया… और सबको बाँटने लगा…
ला चच्चा साथ दा हमहू लोगन का… शनि ने चच्चा की तरफ बढ़ाते हुए कहा…
ह… हा लावा… और साथ मे वो भी उन पैकेट से एक पेठा ले के खाने लगे…
पानी पीने के बाद सभी ने उनको धन्यवाद दिया… और चलने लगे…
ठीक ह चच्चा… चलत हइ… मजा आ गयल…बहुत बहुत धन्यवाद… शनि ने हाथ जोड़ के धन्यवाद दिया…
और सभी आगे बढ़े…

कुछ दूर जा के…
सर.. आप सही थे.. बनारस के यही अल्हड़पन है, आज महसूस हुआ… और सभी अपना सहमति में सिर हिला के आगे बढ़ चले…
और चच्चा फिर एक टांग कुण्डी पर टिका के आराम के साथ फिर दुनिया के खबरों में खो गए…

11 thoughts on “बनारस और उसका अल्हड़पन….

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